🛕 श्रीमद्‍भगवद्‍ गीता 🛕

भगवद गीता किसने लिखी? | bhagwat geeta kisne likhi​

भूमिका (Introduction)

भगवद गीता हिन्दू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसे श्रीमद्भगवद्गीता भी कहा जाता है। यह ग्रंथ महाभारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए दिव्य उपदेश शामिल हैं।
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लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवद गीता किसने लिखी? इस लेख में हम इस प्रश्न का उत्तर विस्तार से जानेंगे।

भगवद गीता किसने लिखी? (bhagwat geeta kisne likhi thi​)

भगवद गीता स्वयं लिखित ग्रंथ नहीं है। यह महाभारत के भीष्म पर्व का एक भाग है। महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं, जिन्होंने इसे संकलित किया। गीता के उपदेश स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्ध में दिए थे, और संजय ने धृतराष्ट्र को इसका वर्णन किया था।

भगवद गीता के अध्याय

भगवद गीता कुल 18 अध्यायों में विभाजित है, और प्रत्येक अध्याय जीवन के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान प्रदान करता है। यहाँ सभी अध्यायों के नाम और उनका संक्षिप्त विवरण दिया गया है:  
  1. अर्जुन विषाद योग  
  2. सांख्य योग
  3. कर्मयोग
  4. ज्ञानकर्मसंन्यास योग
  5. संन्यास योग
  6. आत्मसंयम योग
  7. ज्ञानविज्ञान योग
  8. अक्षरब्रह्म योग
  9. राजविद्याराजगुह्य योग
  10. विभूति योग
  11. विश्वरूपदर्शन योग
  12. भक्तियोग
  13. क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग
  14. गुणत्रय विभाग योग
  15. पुरुषोत्तम योग
  16. दैवासुर संपद्विभाग योग 
  17. श्रद्धात्रय विभाग योग
  18. मोक्षसंन्यास योग
भगवद गीता का प्रत्येक अध्याय हमें जीवन जीने की कला और धर्म, भक्ति, कर्म, संन्यास तथा मोक्ष का सही मार्ग दिखाता है।

भगवद गीता का इतिहास (History of Bhagavad Gita)

  • कालखंड: लगभग 5000 वर्ष पूर्व, द्वापर युग में।
  • स्थान: कुरुक्षेत्र युद्ध का मैदान।
  • मुख्य पात्र: श्रीकृष्ण (उपदेशक), अर्जुन (श्रोता), संजय (वर्णनकर्ता), धृतराष्ट्र (सुनने वाला)।

भगवद गीता का महत्व (Importance of Bhagavad Gita)

भगवद गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का सार है। इसमें दिए गए उपदेश कर्म, धर्म, भक्ति, ज्ञान और योग से जुड़े हैं। कुछ महत्वपूर्ण पहलू:
  • कर्मयोग: निष्काम कर्म की शिक्षा।
  • ज्ञानयोग: आत्मा और ब्रह्म के ज्ञान का महत्व।
  • भक्तियोग: भक्ति और समर्पण का मार्ग।
  • संन्यासयोग: त्याग और मोक्ष की अवधारणा।

भगवद गीता से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting Facts about Bhagavad Gita)

  • भगवद गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।
  • इसे वेदों और उपनिषदों का सार कहा जाता है।
  • गीता का पाठ महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तियों ने भी किया।
  • गीता का अनुवाद 1500+ भाषाओं में किया जा चुका है।

भगवद गीता का आधुनिक जीवन में उपयोग (Relevance in Modern Life)

आज के समय में गीता के सिद्धांत तनावमुक्त जीवन, सफलता, आत्मज्ञान, और निर्णय लेने में मदद करते हैं। बड़े-बड़े लीडर्स और बिजनेस टायकून्स भी गीता के सिद्धांत अपनाते हैं।

भगवद गीता से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ Section)


1. क्या भगवद गीता को भगवान श्रीकृष्ण ने लिखा था?
नहीं, भगवद गीता भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को सुनाई गई थी, जिसे महर्षि वेदव्यास ने महाभारत में संकलित किया।

2. भगवद गीता कितने अध्यायों में विभाजित है?
भगवद गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।

3. भगवद गीता को पढ़ने से क्या लाभ होता है?
इससे जीवन में ध्यान, आत्मविश्वास, शांति, निर्णय लेने की क्षमता, और सकारात्मकता आती है।

4. क्या भगवद गीता का अध्ययन हर किसी के लिए आवश्यक है?
हाँ, क्योंकि यह सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला ज्ञान है।

5. भगवद गीता किस भाषा में लिखी गई थी?
भगवद गीता मूल रूप से संस्कृत भाषा में लिखी गई थी।

भगवद गीता का ज्ञान सिर्फ एक धर्म या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के लिए जीवन का मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ है। महर्षि वेदव्यास ने इसे महाभारत में संकलित किया और भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इसे सुनाया। गीता के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और हमें जीवन में सही निर्णय लेने, कर्म करने और सफलता प्राप्त करने में मदद करते हैं।
"जो हुआ, अच्छे के लिए हुआ। जो हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छे के लिए ही होगा।" – भगवद गीता

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