🛕 श्रीमद्‍भगवद्‍ गीता 🛕

भगवद गीता श्लोक संस्कृत में अर्थ सहित | Bhagwat Geeta Shlok in Sanskrit with Meaning in Hindi

भगवद गीता श्लोक संस्कृत में अर्थ सहित

भगवद गीता (Bhagavad Gita) हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन, धर्म, कर्म और आत्मा के रहस्यों को समझाया है। Shrimad Bhagwat Geeta Shlok with Meaning in Hindi, English and Sanskrit पढ़ने से हमें जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझने में मदद मिलती है।
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इस ग्रंथ में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

भगवद गीता के लोकप्रिय श्लोक हिंदी में | Popular Shlokas of Bhagwad Geeta

गीता के श्लोक हिंदी में पढ़ना मानसिक शांति प्रदान करता है और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। Bhagavad Geeta Shlok in Hindi का अध्ययन करके हम आत्मा की अमरता, भक्ति का महत्व और निष्काम कर्म की शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। Motivational Bhagwat Geeta Shlok (Bhagavad Gita Quotes) in Hindi से हमें जीवन के कठिन समय में धैर्य और संकल्प शक्ति मिलती है।

Geeta Shlok in English & Sanskrit

भगवद गीता केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व में एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में मानी जाती है। Gita Shlok in English के माध्यम से पूरी दुनिया में लोग श्रीकृष्ण के उपदेशों को समझते हैं। Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit का अध्ययन करने से हमें शास्त्रीय भाषा का ज्ञान भी प्राप्त होता है।

Bhagavad Gita Quotes with Meaning

Shlok from Bhagwat Geeta को पढ़कर हम जीवन की सच्चाइयों से अवगत होते हैं। इन श्लोकों में कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग की गहरी शिक्षाएं दी गई हैं। यदि आप shlok of bhagwat geeta in Hindi ढूंढ रहे हैं, तो यहां आपको अर्थ सहित गीता के प्रमुख श्लोक मिलेंगे।

Geeta Shlok in Hindi Images & Visual Representation

अगर आप Geeta Shlok in Hindi Images के माध्यम से गीता श्लोकों को देखना और पढ़ना चाहते हैं, तो कई आकर्षक चित्रों में ये उपलब्ध हैं। संस्कृत में Geeta Shlok (Bhagavad Gita Quotes) in Sanskrit to Hindi पढ़कर आप गीता के गूढ़ ज्ञान को सरल भाषा में समझ सकते हैं।
भगवत गीता के श्लोक जीवन के हर पहलू को सही दिशा में ले जाने में सहायक होते हैं। यदि आप आध्यात्मिक शांति और आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, तो Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit और हिंदी में इन श्लोकों का अध्ययन जरूर करें। 🚩
🔢 श्लोक संख्या: 1
Bhagwat-Geeta-Shlok-in-Sanskrit-with-Meaning-in-Hindi
🔸 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
🔸 अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ श्री कृष्ण कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब तब मैं अपने स्वरूप की रचना करता हूँ।
🌍 English Translation:
✨ Shri Krishna says that whenever there is a decline in righteousness and an increase in unrighteousness, I manifest myself.
🔢 श्लोक संख्या: 2
🔸 परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
🔸 धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए, तथा धर्म की स्थापना के लिए, मैं प्रत्येक युग में प्रकट होता हूँ।
🌍 English Translation:
✨ For the protection of the righteous, the destruction of the wicked, and the establishment of righteousness, I manifest myself in every age.
🔢 श्लोक संख्या: 3
🔸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
🔸 मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ तुम्हारा कर्म करने में ही अधिकार है, लेकिन कर्म के फलों में कभी नहीं। इसलिए, तुम कर्मफल के हेतु मत बनो और न ही अकर्मण्यता में आसक्त हो।
🌍 English Translation:
✨ You have the right to perform your prescribed duties, but never to the fruits of your actions. Do not be motivated by the results of your actions, nor be attached to inaction.
🔢 श्लोक संख्या: 4
🔸 वासांसि जीर्णानि यथा विहाय।
🔸 नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि॥
🔸 तथा शरीराणि विहाय जीर्णानि।
🔸 अन्यानि संयाति नवानि देही॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर धारण करती है।
🌍 English Translation:
✨ Just as a person discards old clothes and wears new ones, similarly, the soul discards old bodies and takes on new ones.
🔢 श्लोक संख्या: 5
🔸 न जायते म्रियते वा कदाचिन्।
🔸 नायं भूत्वा भविता वा न भूयः॥
🔸 अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो।
🔸 न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ आत्मा न कभी जन्म लेती है और न मरती है। न ही यह पहले उत्पन्न हुई थी और न आगे होगी। यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के नष्ट होने पर भी इसका नाश नहीं होता।
🌍 English Translation:
✨ The soul is neither born nor does it ever die. It has neither come into existence at any time, nor will it cease to exist. It is unborn, eternal, everlasting, and ancient. Even when the body is destroyed, the soul is not destroyed.
🔢 श्लोक संख्या: 6
🔸 नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
🔸 स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इस योगमार्ग में किया गया थोड़ा भी प्रयास नष्ट नहीं होता और न ही इसमें कोई पाप का दोष है। यह थोड़ा-सा भी धर्म, महान भय (जन्म-मरण) से रक्षा करता है।
🌍 English Translation:
✨ In this path of yoga, no effort is ever lost, nor is there any negative consequence. Even a little practice of this dharma protects one from great fear (of birth and death).
🔢 श्लोक संख्या: 7
🔸 न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
🔸 कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ कोई भी व्यक्ति एक क्षण के लिए भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति से उत्पन्न गुणों द्वारा विवश होकर कर्म करना पड़ता है।
🌍 English Translation:
✨ No one can remain without action even for a moment. Everyone is forced to act according to the qualities born of their nature.
🔢 श्लोक संख्या: 8
🔸 सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
🔸 अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, इसलिए शोक मत करो।
🌍 English Translation:
✨ Abandon all varieties of dharma and simply surrender unto Me. I shall liberate you from all sins; do not grieve.
🔢 श्लोक संख्या: 9
🔸 योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनञ्जय।
🔸 सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! योग में स्थित होकर कर्म करो, आसक्ति को त्याग कर। सफलता और असफलता में समान रहना ही योग कहलाता है।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! Perform your duties while being steadfast in yoga, abandoning attachment, and remaining indifferent to success or failure. This evenness of mind is called yoga.
🔢 श्लोक संख्या: 10
🔸 यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन।
🔸 ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! जैसे प्रज्वलित अग्नि लकड़ियों को जलाकर भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि समस्त कर्मों को भस्म कर देती है।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! Just as a blazing fire reduces wood to ashes, similarly, the fire of knowledge burns all karma to ashes.
🔢 श्लोक संख्या: 11
🔸 उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
🔸 आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मनुष्य को स्वयं ही अपना उद्धार करना चाहिए और स्वयं को पतन की ओर नहीं ले जाना चाहिए, क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र और शत्रु होती है।
🌍 English Translation:
✨ One must elevate oneself by one’s own mind and not degrade oneself. The mind alone is both the friend and the enemy of the self.
🔢 श्लोक संख्या: 12
🔸 ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः।
🔸 तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिनका अज्ञान आत्मज्ञान से नष्ट हो चुका है, उनके लिए यह ज्ञान सूर्य के समान परम तत्व को प्रकाशित करता है।
🌍 English Translation:
✨ For those whose ignorance is destroyed by knowledge, that knowledge, like the sun, reveals the Supreme Truth.
🔢 श्लोक संख्या: 13
🔸 श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप।
🔸 सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे परंतप अर्जुन! पदार्थों से किया गया यज्ञ ज्ञान यज्ञ से श्रेष्ठ है, क्योंकि सभी कर्म ज्ञान में ही समाप्त हो जाते हैं।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! The sacrifice performed in knowledge is superior to mere material offerings, for all actions ultimately culminate in knowledge.
🔢 श्लोक संख्या: 14
🔸 निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः।
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ निराश्रय, ममता से रहित और चिंता से मुक्त होकर युद्ध करो।
🌍 English Translation:
✨ Fight without attachment, free from desire, and with a peaceful mind.
🔢 श्लोक संख्या: 15
🔸 विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः।
🔸 रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्ट्वा निवर्तते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इंद्रियों के विषय त्याग देने पर भी, उनमें आसक्ति बनी रहती है; किंतु परम तत्व के दर्शन के बाद वह भी समाप्त हो जाती है।
🌍 English Translation:
✨ Even when one abstains from sensual pleasures, the taste for them remains; but upon realizing the Supreme, even this taste disappears.
🔢 श्लोक संख्या: 16
🔸 कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम्।
🔸 अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति काम और क्रोध से मुक्त हैं, जिन्होंने अपने मन को वश में कर लिया है और आत्मज्ञान प्राप्त कर लिया है, वे सभी ओर से ब्रह्मनिर्वाण (परम शांति) को प्राप्त होते हैं।
🌍 English Translation:
✨ For those who are free from lust and anger, who have subdued their mind and attained self-realization, Brahman’s ultimate peace is near.
🔢 श्लोक संख्या: 17
🔸 नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः।
🔸 मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मैं सभी के लिए प्रत्यक्ष नहीं होता क्योंकि योगमाया से ढका हुआ हूँ। यह मोहग्रस्त संसार मुझे अजन्मा और अविनाशी परमात्मा के रूप में नहीं जानता।
🌍 English Translation:
✨ I am not manifest to everyone, being veiled by My divine yoga-maya. The deluded world does not recognize Me as the unborn and imperishable Supreme.
🔢 श्लोक संख्या: 18
🔸 स्वभावजेन कौन्तेय निबद्धः स्वेन कर्मणा।
🔸 कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! अपने स्वभाव से उत्पन्न कर्म के अनुसार तुम बंधे हुए हो। मोहवश जो तुम करना नहीं चाहते, उसे भी तुम करने के लिए विवश हो जाओगे।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! Being bound by your nature-born duties, you will involuntarily act according to them, even against your will, due to illusion.
🔢 श्लोक संख्या: 19
🔸 बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम्।
🔸 स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति बाहरी विषयों में आसक्त नहीं होता और अपने भीतर आनंद प्राप्त करता है, वह ब्रह्मयोग में स्थित होकर शाश्वत सुख का अनुभव करता है।
🌍 English Translation:
✨ The one who is unattached to external pleasures and finds joy within the self, being united with Brahman through yoga, attains eternal bliss.
🔢 श्लोक संख्या: 20
🔸 न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः।
🔸 यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो शरीर धारण किए हुए हैं, वे समस्त कर्मों का पूरी तरह से त्याग नहीं कर सकते, लेकिन जो केवल कर्मफल का त्याग करता है, वही सच्चा संन्यासी कहलाता है।
🌍 English Translation:
✨ For those who have taken a body, complete renunciation of action is not possible. But one who renounces the fruits of action is truly considered a renunciate.
🔢 श्लोक संख्या: 21
🔸 विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः।
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिसका इच्छा, भय और क्रोध समाप्त हो चुका है, वह सदा मुक्त रहता है।
🌍 English Translation:
✨ One who is free from desires, fear, and anger is always liberated.
🔢 श्लोक संख्या: 22
🔸 नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः।
🔸 न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! जो अत्यधिक भोजन करता है, या जो बिल्कुल नहीं खाता, जो बहुत अधिक सोता है या जो बिल्कुल नहीं सोता, उसका योग संभव नहीं है।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! There is no possibility of yoga for one who eats too much or too little, who sleeps excessively or who does not sleep at all.
🔢 श्लोक संख्या: 23
🔸 न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते।
🔸 न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ कर्मों का त्याग करने मात्र से मनुष्य निष्कर्मता (क्रियाहीनता) को प्राप्त नहीं करता और न ही केवल संन्यास धारण कर सिद्धि प्राप्त कर सकता है।
🌍 English Translation:
✨ A person does not attain freedom from action by merely abstaining from work, nor does he achieve perfection merely by renouncing action.
🔢 श्लोक संख्या: 24
🔸 नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया।
🔸 शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मुझे इस दिव्य रूप में न तो वेदों के अध्ययन द्वारा, न तपस्या से, न दान से और न ही यज्ञ से देखा जा सकता है।
🌍 English Translation:
✨ Neither through the Vedas, nor through austerities, nor by charity, nor by sacrifice can I be seen in this divine form as you have seen Me.
🔢 श्लोक संख्या: 25
🔸 प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
🔸 अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ प्रकृति के गुणों से सभी कर्म संपन्न होते हैं, परंतु अहंकार से मोहग्रस्त व्यक्ति सोचता है कि वह स्वयं कर्ता है।
🌍 English Translation:
✨ All actions are performed by the modes of material nature, but one whose mind is deluded by ego thinks, “I am the doer.”
🔢 श्लोक संख्या: 26
🔸 मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
🔸 मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मुझे मन से स्मरण करो, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो और मुझे प्रणाम करो। इस प्रकार आत्मा को मुझमें समर्पित करके तुम निश्चित रूप से मुझमें ही आओगे।
🌍 English Translation:
✨ Fix your mind on Me, be devoted to Me, worship Me, and offer obeisance to Me. Thus, uniting yourself with Me, you shall surely come to Me.
🔢 श्लोक संख्या: 27
🔸 यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
🔸 तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जहाँ योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहीं पर निश्चित रूप से श्री, विजय, ऐश्वर्य और अचल नीति होती है, यह मेरा मत है।
🌍 English Translation:
✨ Wherever there is Lord Krishna, the Master of Yoga, and wherever there is Arjuna, the wielder of the bow, there will certainly be fortune, victory, prosperity, and unwavering righteousness. This is my opinion.
🔢 श्लोक संख्या: 28
🔸 अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
🔸 तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो भक्त अनन्य भाव से मेरा चिंतन और उपासना करते हैं, मैं उनके योग (नवीन आवश्यकताओं) और क्षेम (जो कुछ उनके पास है उसकी रक्षा) का वहन करता हूँ।
🌍 English Translation:
✨ To those who always worship Me with exclusive devotion, thinking of Me alone, I provide what they lack and preserve what they have.
🔢 श्लोक संख्या: 29
🔸 यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः।
🔸 समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति बिना इच्छा के प्राप्त होने वाले में संतुष्ट रहता है, जो द्वंद्वों से परे है, जिसमें ईर्ष्या नहीं है, और जो सफलता तथा असफलता में समान भाव रखता है, वह कर्म करने पर भी बंधन में नहीं पड़ता।
🌍 English Translation:
✨ He who is content with whatever comes by chance, who is free from dualities and envy, and who remains steady in success and failure, is not bound by actions.
🔢 श्लोक संख्या: 30
🔸 नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन।
🔸 न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ ऐसे सिद्ध पुरुष के लिए न तो कर्म करने में कोई प्रयोजन रहता है और न ही कर्म न करने से कोई हानि होती है। और न ही उसे किसी अन्य जीव पर निर्भर रहने की आवश्यकता होती है।
🌍 English Translation:
✨ For such a realized soul, there is no purpose in performing work, nor any reason for not performing it. Nor does he depend on any living being for any purpose.
🔢 श्लोक संख्या: 31
🔸 श्रद्धावान्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।
🔸 ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ श्रद्धावान् पुरुष जो ज्ञान के लिए तत्पर रहता है और अपने इंद्रियों को संयमित रखता है, वह ज्ञान प्राप्त करता है। और जब उसे ज्ञान प्राप्त हो जाता है, तब वह शीघ्र ही परम शांति को प्राप्त कर लेता है।
🌍 English Translation:
✨ A faithful person, who is devoted to knowledge and has control over the senses, attains divine knowledge. Having gained this knowledge, he quickly attains supreme peace.
🔢 श्लोक संख्या: 32
🔸 योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
🔸 सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे धनंजय! योग में स्थित होकर, आसक्ति को त्यागकर कर्म करो। सफलता और असफलता में समान भाव रखना ही योग कहलाता है।
🌍 English Translation:
✨ O Dhananjaya (Arjuna), perform your duties established in yoga, renouncing attachment. Maintain equanimity in success and failure, for such evenness of mind is called yoga.
🔢 श्लोक संख्या: 33
🔸 व्यासोच्छिष्टं जगत्सर्वं मुखे व्यासस्य मे स्थितम्।
🔸 व्यासाद्विनिर्गता वाणी सर्वत्र गतिरस्ति मे॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ महर्षि व्यास द्वारा कहे गए शब्द ही सम्पूर्ण जगत में व्याप्त हैं। उनके वचनों में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सार निहित है और मेरी वाणी सर्वत्र व्याप्त है।
🌍 English Translation:
✨ The words spoken by Sage Vyasa pervade the entire universe. His words contain the essence of the whole cosmos, and my speech is present everywhere.
🔢 श्लोक संख्या: 34
🔸 नित्यसत्त्वस्थः शुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः।
🔸 सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो सदा सत्वगुण में स्थित रहता है, जिसकी आत्मा शुद्ध होती है, जिसने मन पर विजय प्राप्त कर ली है, तथा जिसने इंद्रियों को वश में कर लिया है—वह समस्त जीवों के आत्मा को आत्मस्वरूप में देखता है। ऐसा व्यक्ति कर्म करता हुआ भी कर्म के बंधन में नहीं बंधता।
🌍 English Translation:
✨ One who is established in purity, who has conquered the mind and controlled the senses, who sees his own self in all beings—such a person, though engaged in action, is not bound by karma.
🔢 श्लोक संख्या: 35
🔸 सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।
🔸 ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ योगयुक्त व्यक्ति, जो समभाव से देखता है, वह अपने आत्मा को सभी प्राणियों में और सभी प्राणियों को अपने आत्मा में देखता है।
🌍 English Translation:
✨ A yogi, who is established in union with the Divine and sees with equality, perceives the Self in all beings and all beings in the Self.
🔢 श्लोक संख्या: 36
🔸 यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
🔸 तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति मुझे सभी जगह देखता है और सभी कुछ मुझमें देखता है, मैं उसके लिए अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिए अदृश्य नहीं होता।
🌍 English Translation:
✨ One who sees Me everywhere and sees everything in Me, I am never lost to him, nor is he ever lost to Me.
🔢 श्लोक संख्या: 37
🔸 बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
🔸 तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस व्यक्ति की बुद्धि योगयुक्त होती है, वह पुण्य और पाप दोनों को त्याग देता है। इसलिए योग में स्थित होकर कर्म करो, क्योंकि योग ही कर्मों में कुशलता है।
🌍 English Translation:
✨ One who is endowed with wisdom in yoga relinquishes both good and evil deeds in this life itself. Therefore, strive for yoga, which is skill in action.
🔢 श्लोक संख्या: 38
🔸 समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः।
🔸 शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो शत्रु और मित्र में, मान और अपमान में, सर्दी और गर्मी में, सुख और दुःख में समान रहता है तथा आसक्ति से मुक्त है, वही श्रेष्ठ योगी है।
🌍 English Translation:
✨ That person who remains equal toward friends and foes, honor and dishonor, heat and cold, happiness and distress, and who is free from attachment is the supreme yogi.
🔢 श्लोक संख्या: 39
🔸 यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।
🔸 शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो न हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न किसी वस्तु की कामना करता है और शुभ-अशुभ कर्मों का त्याग कर देता है, वह भक्त मुझे प्रिय है।
🌍 English Translation:
✨ One who neither rejoices nor hates, neither laments nor desires, and who renounces both good and evil actions—such a devotee is dear to Me.
🔢 श्लोक संख्या: 40
🔸 विद्या विनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
🔸 शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चाण्डाल में समान दृष्टि रखते हैं, वे ही सच्चे ज्ञानी हैं।
🌍 English Translation:
✨ The wise see a learned and humble Brahmin, a cow, an elephant, a dog, and a dog-eater with equal vision.
🔢 श्लोक संख्या: 41
🔸 दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
🔸 मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मेरी यह दिव्य माया तीन गुणों से बनी हुई है और अत्यंत दुस्तर है, परन्तु जो मेरी शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।
🌍 English Translation:
✨ This divine energy of Mine, consisting of the three modes of material nature, is difficult to overcome. But those who surrender unto Me can easily cross beyond it.
🔢 श्लोक संख्या: 42
🔸 यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः।
🔸 क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस प्रकार एक सूर्य सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार आत्मा सम्पूर्ण शरीर को प्रकाशित करता है।
🌍 English Translation:
✨ As the sun illuminates the entire world, similarly, the soul within the body illuminates the entire field of the body.
🔢 श्लोक संख्या: 43
🔸 ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः।
🔸 जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सत्त्वगुण में स्थित लोग ऊर्ध्वगति को प्राप्त होते हैं, राजसिक प्रकृति के लोग मध्य में रहते हैं, और तामसिक गुण वाले अधोगति को प्राप्त होते हैं।
🌍 English Translation:
✨ Those situated in the mode of goodness rise upward, those in the mode of passion remain in the middle, and those in the mode of ignorance go downward.
🔢 श्लोक संख्या: 44
🔸 त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
🔸 निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ वेद तीन गुणों से युक्त विषयों का प्रतिपादन करते हैं। हे अर्जुन! तुम इन तीनों गुणों से रहित हो जाओ, सभी द्वन्द्वों से मुक्त रहो, सत्त्वगुण में स्थिर रहो और आत्मा के कल्याण में स्थित रहो।
🌍 English Translation:
✨ The Vedas deal with the three modes of material nature. O Arjuna, transcend these modes. Be free from all dualities, be established in the mode of goodness, and focus on self-realization.
🔢 श्लोक संख्या: 45
🔸 य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्।
🔸 उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो इसे (आत्मा को) मारने वाला समझता है और जो इसे मरा हुआ मानता है, वे दोनों ही अज्ञानी हैं। आत्मा न तो किसी को मारती है और न ही इसे कोई मार सकता है।
🌍 English Translation:
✨ One who thinks that the soul kills or is killed does not understand the truth. The soul neither kills nor can be killed.
🔢 श्लोक संख्या: 46
🔸 न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन।
🔸 नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे पार्थ! मेरे लिए तीनों लोकों में कोई कर्तव्य नहीं है, न ही कोई अप्राप्त वस्तु है जिसे मुझे प्राप्त करना हो, फिर भी मैं कर्म में स्थित रहता हूँ।
🌍 English Translation:
✨ O Partha! There is nothing in the three worlds for Me to do, nor is there anything unattained that I need to attain, yet I engage in action.
🔢 श्लोक संख्या: 47
🔸 न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
🔸 तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इस संसार में ज्ञान के समान कोई भी पवित्र वस्तु नहीं है। जो योग में सिद्ध हो जाता है, वह अपने भीतर ही समय के साथ उस ज्ञान को प्राप्त करता है।
🌍 English Translation:
✨ There is nothing as purifying as knowledge in this world. A person who is perfected in yoga finds this knowledge within himself in due course of time.
🔢 श्लोक संख्या: 48
🔸 तस्मादज्ञानसंभूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः।
🔸 छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इसलिए, अज्ञान से उत्पन्न अपने हृदय में स्थित संदेह को ज्ञान की तलवार से काटकर योग में स्थित होकर उठ खड़े हो, हे भारत!
🌍 English Translation:
✨ Therefore, cutting this doubt in your heart that has arisen from ignorance with the sword of knowledge, stand up and take refuge in yoga, O Bharata!
🔢 श्लोक संख्या: 49
🔸 यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता।
🔸 योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस प्रकार वायु रहित स्थान में रखा हुआ दीपक नहीं टिमटिमाता, उसी प्रकार आत्म-संयमी योगी का मन भी योग में स्थिर रहता है।
🌍 English Translation:
✨ Just as a lamp in a windless place does not flicker, so is the mind of the yogi who is disciplined and engaged in the practice of yoga.
🔢 श्लोक संख्या: 50
🔸 नात्मनः पृथिवीं श्रियं कान्तारं वा पुनः प्रियम्।
🔸 न स्पृहेत कश्चिद्यः समाधिस्थो मुनिर्भवेत्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो साधक समाधि में स्थित हो जाता है, वह न तो सांसारिक संपत्ति की इच्छा करता है, न किसी स्थान की, और न ही किसी प्रिय वस्तु की।
🌍 English Translation:
✨ The sage who is established in meditation does not crave for worldly wealth, a particular place, or even a dear object.
🔢 श्लोक संख्या: 51
🔸 सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।
🔸 मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो मेरा आश्रय लेकर सभी कर्म करता है, वह मेरी कृपा से शाश्वत, अविनाशी परम पद को प्राप्त कर लेता है।
🌍 English Translation:
✨ One who takes refuge in Me and performs all actions attains My eternal and imperishable abode by My grace.
🔢 श्लोक संख्या: 52
🔸 योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना।
🔸 श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सभी योगियों में से वही सबसे श्रेष्ठ है जो पूर्ण श्रद्धा के साथ अंतःकरण से मुझमें स्थित होकर मेरी भक्ति करता है।
🌍 English Translation:
✨ Among all yogis, the one who worships Me with faith, whose inner self is absorbed in Me, is considered the highest of all.
🔢 श्लोक संख्या: 53
🔸 श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
🔸 स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ स्वधर्म का पालन करना, भले ही वह दोषयुक्त हो, परधर्म को अच्छी तरह से निभाने से श्रेष्ठ है। स्वधर्म में मरना भी श्रेयस्कर है, जबकि परधर्म भय उत्पन्न करने वाला है।
🌍 English Translation:
✨ It is better to perform one's own duty, even imperfectly, than to perform another's duty perfectly. Death in one's own duty is better; another's duty is fraught with fear.
🔢 श्लोक संख्या: 54
🔸 सत्त्वात्संजायते ज्ञानं रजसो लोभ एव च।
🔸 प्रमादमोहौ तमसो भवतोऽज्ञानमेव च॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सत्त्वगुण से ज्ञान उत्पन्न होता है, रजोगुण से लोभ उत्पन्न होता है, और तमोगुण से प्रमाद, मोह और अज्ञान उत्पन्न होते हैं।
🌍 English Translation:
✨ From the mode of goodness arises knowledge; from the mode of passion arises greed, and from the mode of ignorance arise negligence, delusion, and ignorance.
🔢 श्लोक संख्या: 55
🔸 न जायते म्रियते वा कदाचिन्
🔸 नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
🔸 अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
🔸 न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ (भगवद गीता 2.20)
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ आत्मा न कभी जन्म लेती है, न कभी मरती है। न ही यह किसी समय उत्पन्न होकर पुनः अस्तित्व में आती है। यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के नष्ट होने पर भी आत्मा नष्ट नहीं होती।
🌍 English Translation:
✨ The soul is never born nor does it ever die. It has not come into being, nor will it come into being again. It is unborn, eternal, ever-existing, and primeval. It is not slain when the body is slain.
🔢 श्लोक संख्या: 56
🔸 वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
🔸 नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।
🔸 तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-
🔸 न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर प्राप्त करती है।
🌍 English Translation:
✨ Just as a person discards old clothes and wears new ones, similarly, the soul discards worn-out bodies and takes on new ones.
🔢 श्लोक संख्या: 57
🔸 न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः।
🔸 न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ न तो मैं कभी न था, न तुम थे, और न ही ये राजाओं का समूह। और आगे भी हम सब कभी नहीं रहेंगे, ऐसा नहीं होगा।
🌍 English Translation:
✨ Never was there a time when I did not exist, nor you, nor all these kings. Nor will there ever be a time in the future when we shall cease to exist.
🔢 श्लोक संख्या: 58
🔸 आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनम्
🔸 आश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः।
🔸 आश्चर्यवच्चैनमन्यः श्रृणोति
🔸 श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ कोई इसे आश्चर्य के रूप में देखता है, कोई इसे आश्चर्य के रूप में वर्णन करता है, कोई इसे आश्चर्य के रूप में सुनता है, और फिर भी कोई इसे सुनकर भी नहीं समझता।
🌍 English Translation:
✨ Some behold the soul as amazing, some describe it as amazing, some hear of it as amazing, yet even after hearing, no one truly understands it.
🔢 श्लोक संख्या: 59
🔸 यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः।
🔸 तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! यज्ञ के लिए किए गए कर्मों को छोड़कर अन्य सभी कर्म इस संसार में बंधन का कारण बनते हैं। इसलिए, आसक्ति से रहित होकर उस उद्देश्य के लिए कर्म कर।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna, all actions other than those performed as a sacrifice to the Supreme bind one to this world. Therefore, perform your duty without attachment, for the sake of that sacrifice.
🔢 श्लोक संख्या: 60
🔸 न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम्।
🔸 जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो अज्ञानी लोग कर्म में आसक्त हैं, उनके मन में भ्रम उत्पन्न न करें। ज्ञानी पुरुष को चाहिए कि वह स्वयं कर्म में संलग्न रहते हुए उन्हें भी कर्म करने के लिए प्रेरित करे।
🌍 English Translation:
✨ The wise should not unsettle the minds of the ignorant who are attached to fruitive work. Instead, by performing all actions in a disciplined manner, they should inspire them to do the same.
🔢 श्लोक संख्या: 61
🔸 ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्नुते।
🔸 अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्त्वं न तमो न रजः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ अब मैं तुम्हें वह तत्व बताऊँगा जिसे जानकर अमरत्व की प्राप्ति होती है। वह ब्रह्म न तो सत्त्वगुण से युक्त है, न रजोगुण से, न ही तमोगुण से।
🌍 English Translation:
✨ I shall now explain that which is to be known, by knowing which one attains immortality. That supreme Brahman is beginningless, beyond both the manifest and the unmanifest, and it transcends the modes of nature.
🔢 श्लोक संख्या: 62
🔸 उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
🔸 आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिए, और स्वयं को गिराना नहीं चाहिए, क्योंकि आत्मा ही मनुष्य का मित्र होती है और आत्मा ही मनुष्य की शत्रु भी बन सकती है।
🌍 English Translation:
✨ One must elevate oneself by one’s own mind and not degrade oneself. The mind is a friend of the conditioned soul, and it can also be its enemy.
🔢 श्लोक संख्या: 63
🔸 विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः।
🔸 निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो सभी इच्छाओं को त्यागकर, बिना किसी आसक्ति के, अहंकार और ममत्व रहित होकर विचरण करता है, वही शांति प्राप्त करता है।
🌍 English Translation:
✨ That person attains peace who, abandoning all desires, moves about without longing, without any sense of ownership, and free from ego.
🔢 श्लोक संख्या: 64
🔸 सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
🔸 ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सुख-दुःख, लाभ-हानि, और जीत-हार को समान मानकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ, इस प्रकार तुम पाप को प्राप्त नहीं करोगे।
🌍 English Translation:
✨ Considering pleasure and pain, gain and loss, victory and defeat to be the same, engage in battle for the sake of duty. By doing so, you will not incur sin.
🔢 श्लोक संख्या: 65
🔸 ब्रह्मण्याधाय कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः।
🔸 लिप्यते न स पापेन पद्मपत्रमिवाम्भसा॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो अपने सभी कर्मों को ब्रह्म को समर्पित करके, आसक्ति को त्यागकर कर्म करता है, वह पाप से उतना ही अछूता रहता है, जितना कि जल में कमल का पत्ता।
🌍 English Translation:
✨ One who performs actions dedicating them to the Supreme and renouncing all attachment remains untouched by sin, just as a lotus leaf remains unaffected by water.
🔢 श्लोक संख्या: 66
🔸 नित्यं सत्त्वस्थः सत्त्वस्य शुद्धिं ज्ञानस्य च स्थिराम्।
🔸 ज्ञानयोगविवृद्धिश्च प्रह्मसंसिद्धिरुत्तमा॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सत्त्वगुण में स्थित व्यक्ति की बुद्धि स्थिर होती है, वह ज्ञान में स्थिर रहता है और सर्वोच्च सिद्धि को प्राप्त करता है।
🌍 English Translation:
✨ A person situated in the mode of goodness attains purity, stability of knowledge, and ultimate liberation.
🔢 श्लोक संख्या: 67
🔸 अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः।
🔸 सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ यदि तुम सबसे बड़े पापी भी हो, तो भी ज्ञानरूपी नौका द्वारा तुम सभी पापों से पार हो सकते हो।
🌍 English Translation:
✨ Even if you are the greatest sinner, you will cross over all sin by the boat of transcendental knowledge.
🔢 श्लोक संख्या: 68
🔸 क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
🔸 क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे पार्थ! यह कायरता तुम्हारे लिए उचित नहीं है। हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर खड़े हो जाओ, हे परंतप!
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna, do not yield to this degrading impotence, for it does not suit you. Give up this base weakness of heart and arise, O chastiser of the enemies.
🔢 श्लोक संख्या: 69
🔸 मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय।
🔸 मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे धनंजय! मुझसे बढ़कर कुछ भी नहीं है। यह समस्त सृष्टि मेरे भीतर मोतियों की माला की तरह गुंथी हुई है।
🌍 English Translation:
✨ O Dhananjaya, there is nothing higher than Me. Everything rests in Me as pearls are strung on a thread.
🔢 श्लोक संख्या: 70
🔸 यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः।
🔸 इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥ (भगवद गीता 2.58)
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को संकुचित कर लेता है, उसी प्रकार जो व्यक्ति अपने इंद्रियों को इंद्रिय-विषयों से हटा लेता है, उसकी बुद्धि स्थिर होती है।
🌍 English Translation:
✨ One who withdraws the senses from sense objects, like a tortoise withdrawing its limbs, his wisdom is firmly established.
🔢 श्लोक संख्या: 71
🔸 समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम्।
🔸 विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति सभी प्राणियों में समान रूप से स्थित परमेश्वर को देखता है, और नाशवान शरीरों के भीतर अविनाशी आत्मा को देखता है, वही वास्तव में देखता है।
🌍 English Translation:
✨ One who sees the Supreme Lord equally present in all beings, the imperishable within the perishable, truly sees.
🔢 श्लोक संख्या: 72
🔸 वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्।
🔸 कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो व्यक्ति आत्मा को अविनाशी, नित्य, अजन्मा और अव्यय (अक्षय) समझता है, वह किसी को मार सकता है या मारे जाने की सोच भी कैसे सकता है?
🌍 English Translation:
✨ He who knows the soul to be indestructible, eternal, unborn, and immutable—how can that person kill anyone, or cause anyone to be killed?
🔢 श्लोक संख्या: 73
🔸 व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम्।
🔸 योगं योगेश्वरात्कृष्णात्साक्षात्कथयतः स्वयम्॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ व्यास जी की कृपा से मैंने इस परम गोपनीय योग को स्वयं योगेश्वर श्रीकृष्ण से प्रत्यक्ष रूप से सुना है।
🌍 English Translation:
✨ By the grace of Vyasa, I have heard this supreme and secret yoga directly from the Lord of Yoga, Krishna, Himself.
🔢 श्लोक संख्या: 74
🔸 मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय।
🔸 निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ अपने मन को मुझमें स्थिर कर और अपनी बुद्धि को मुझमें लगा। इसके बाद तू निश्चित रूप से मुझमें ही निवास करेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
🌍 English Translation:
✨ Fix your mind on Me and establish your intellect in Me alone. Thereafter, you shall surely dwell in Me—there is no doubt about it.
🔢 श्लोक संख्या: 75
🔸 यस्य नाहंकृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते।
🔸 हत्वाऽपि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निबध्यते॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जिसके भीतर अहंकार का भाव नहीं है और जिसकी बुद्धि लिप्त नहीं होती, वह व्यक्ति इन सभी लोकों को नष्ट कर भी न हत्यारा होता है, न ही बंधन में पड़ता है।
🌍 English Translation:
✨ He who is free from ego and whose intellect is unattached does not kill nor is bound, even if he slays all these worlds.
🔢 श्लोक संख्या: 76
🔸 न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन।
🔸 नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे पार्थ! तीनों लोकों में मुझे कोई कर्तव्य नहीं है, न ही मुझे कुछ प्राप्त करना बाकी है, फिर भी मैं कर्म में ही स्थित रहता हूँ।
🌍 English Translation:
✨ O Partha! In all the three worlds, I have nothing to gain or achieve, yet I am always engaged in action.
🔢 श्लोक संख्या: 77
🔸 तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च।
🔸 मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इसलिए, हे अर्जुन! सदा मेरा स्मरण करो और युद्ध करो। यदि तुम्हारी मन-बुद्धि मुझमें अर्पित होगी, तो तुम निश्चय ही मुझ तक पहुँचोगे।
🌍 English Translation:
✨ Therefore, O Arjuna! Always think of Me and fight. With your mind and intellect surrendered to Me, you will surely attain Me without doubt.
🔢 श्लोक संख्या: 78
🔸 यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः।
🔸 इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे कौन्तेय! अत्यंत ज्ञानी पुरुष भी जब प्रयास करता है, तब भी चंचल इंद्रियाँ उसके मन को बलपूर्वक विचलित कर सकती हैं।
🌍 English Translation:
✨ O Kaunteya! Even a wise person who strives for self-control may be forcibly carried away by the turbulent senses.
🔢 श्लोक संख्या: 79
🔸 नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
🔸 तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इस संसार में ज्ञान के समान कोई भी पवित्र वस्तु नहीं है। जो व्यक्ति योग में सिद्ध होता है, वह समय के साथ इसे स्वयं आत्मा में प्राप्त करता है।
🌍 English Translation:
✨ In this world, nothing is as purifying as knowledge. One who is perfect in yoga realizes this in due course of time within the self.
🔢 श्लोक संख्या: 80
🔸 कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
🔸 लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जनकादि महापुरुषों ने भी केवल कर्म द्वारा ही सिद्धि प्राप्त की थी। अतः लोकसंग्रह (विश्व के कल्याण) की भावना से कार्य करना चाहिए।
🌍 English Translation:
✨ Even great kings like Janaka attained perfection through action. Therefore, you should perform your duty for the welfare of the world.
🔢 श्लोक संख्या: 81
🔸 विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि।
🔸 शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चांडाल में समान दृष्टि रखते हैं, वे ही सच्चे ज्ञानी होते हैं।
🌍 English Translation:
✨ The wise see a learned and humble Brahmin, a cow, an elephant, a dog, and an outcaste with equal vision.
🔢 श्लोक संख्या: 82
🔸 तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर।
🔸 असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ इसलिए आसक्तिरहित होकर सदा अपने कर्तव्य का पालन करो। आसक्ति रहित होकर कर्म करने से मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त करता है।
🌍 English Translation:
✨ Therefore, always perform your duty without attachment. By acting without attachment, a person attains the Supreme.
🔢 श्लोक संख्या: 83
🔸 न मे द्वेष्यार्थं कर्म किञ्चिन्मे प्रियं।
🔸 नाहमात्मानमश्नामि भूतानामहमात्मनः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ मुझे न तो किसी से द्वेष है और न ही किसी के प्रति विशेष प्रियता है। मैं स्वयं को किसी के लिए नहीं रखता, बल्कि सभी जीवों के लिए आत्मा रूप में स्थित हूँ।
🌍 English Translation:
✨ I neither have enmity towards anyone nor favoritism. I do not exist for myself alone, but I reside as the soul within all living beings.
🔢 श्लोक संख्या: 84
🔸 अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः।
🔸 अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ हे अर्जुन! मैं समस्त जीवों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ। मैं ही सभी प्राणियों का आदि, मध्य और अंत हूँ।
🌍 English Translation:
✨ O Arjuna! I am the soul seated in the hearts of all living beings. I am the beginning, middle, and end of all creatures.
🔢 श्लोक संख्या: 85
🔸 अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे।
🔸 रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ सभी प्राणी अव्यक्त से प्रकट होते हैं और दिन के प्रारंभ में उत्पन्न होते हैं तथा रात्रि के प्रारंभ में पुनः अव्यक्त में लीन हो जाते हैं।
🌍 English Translation:
✨ All living beings manifest from the unmanifested at the beginning of the day and merge back into the unmanifested at the onset of the night.
🔢 श्लोक संख्या: 86
🔸 क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।
🔸 कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो भी मेरा भक्त बन जाता है, वह शीघ्र ही धर्मात्मा बन जाता है और शाश्वत शांति को प्राप्त करता है। हे कौन्तेय! यह मेरा वचन है कि मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता।
🌍 English Translation:
✨ Soon does he become virtuous and attains lasting peace. O Kaunteya! Declare it boldly that My devotee never perishes.
🔢 श्लोक संख्या: 87
🔸 सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।
🔸 मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ जो निरंतर संतुष्ट, योग में स्थित, आत्मसंयमी, दृढ़ निश्चयी और मुझमें मन-बुद्धि को अर्पित करने वाला भक्त है, वह मुझे प्रिय है।
🌍 English Translation:
✨ One who is always content, self-controlled, firm in determination, and who dedicates his mind and intellect to Me, is very dear to Me.
🔢 श्लोक संख्या: 88
🔸 न जायते म्रियते वा कदाचि-
🔸 न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
🔸 अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
🔸 न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है। न तो यह पहले उत्पन्न हुई थी, न अब उत्पन्न होती है और न आगे होगी। यह अजन्मा, नित्य, शाश्वत और पुरातन है। शरीर के नष्ट होने पर भी यह नष्ट नहीं होती।
🌍 English Translation:
✨ The soul is neither born nor does it ever die. It has not come into being, does not come into being, and will not come into being. It is unborn, eternal, permanent, and primeval. Even when the body is destroyed, the soul is not slain.
🔢 श्लोक संख्या: 89
🔸 श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
🔸 स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥
📝 हिंदी अनुवाद:
✅ अपने धर्म में मर जाना भी कल्याणकारी है, परंतु दूसरे के धर्म का पालन करना भय उत्पन्न करने वाला है।
🌍 English Translation:
✨ It is better to die performing one’s own duty than to follow another’s path, which is fraught with fear.

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